बाप की रखैल बनी बेटी  part -2 | Family sex story

wild fantasy कहानी में पढ़ें कि विधुर बाप की कामुक नजरें कमसिन जवान बेटी के सेक्सी बदन पर थी. बेटी को भी अपने पापा की मंशा का आभास हो गया था और …

कहानी के पहले भाग बाप की रखैल बनी बेटी में आपने पढ़ा कि विधुर दिनेश की वासना से भरी निगाहें उसकी कमसिन जवान बेटी के सेक्सी जिस्म पर टिकने लगी थी. बेटी को भी इस बात का आभास हो चुका था और वो अपने पापा के इस ख्याल से रोमांचित थी.

एक लंबा सांस खींचते ही उसके फेफड़े अपनी बेटी की चूत की महक से भर गए।

“क्या माया चुदने लगी है?”
सिगरेट के काश के साथ ‘आहह हहह’
“नहीं यार … अभी तो छोटी है!
एक काश और ‘आहह हहह!’

दिनेश ने हर सांस के साथ पैंटी को सूंघते हुए सिगरेट खत्म कर दी। (Family sex story)

अब आगे wild fantasy कहानी:

पैंटी को वापस उसी जगह डालते हुए वो माया के कमरे की तरफ बढ़ा।

दरवाज़े को हौले से धकेलते हुए जैसे ही उसकी नज़र माया पर पड़ी उसके होश उड़ गए।

उसने कमरे के अंदर दो कदम और आगे बढ़ा दिए.

माया की स्कर्ट ऊपर उठ के उसके पेट पर पड़ी थी और सफेद चिकनी जाँघों के बीच सफाचट चूत हीरे सी चमक रही थी।
उसकी बेटी का टॉप भी ऊपर खिसका हुआ था जिसमें से एक चूचा पूरी तरह बाहर था।

यह नज़ारा देख दिनेश को जैसे सांप सूंघ गया।
वो बुत बना खड़ा एकटक नंगी सो रही अपनी बेटी के अधनंगे बदन को निहारे जा रहा था।

उसका ध्यान जब टूटा जब लंड ने अकड़ कर लोअर का टेंट बना दिया।
ध्यान टूटते ही तुरंत दिनेश ने यू टर्न लिया और कमरे से बाहर आ गया। (Family sex story)

वो वहीं दीवार से लगा सोचने लगा कि आखिर करे तो क्या करे।
इस हालत में बेटी को देखना भी गलत लग रहा था और साथ ही अपने कमरे में लौट जाने को भी कदम नहीं पड़ रहे थे।

बहुत देर सोच विचार करने के बाद उसके विवेक और मर्यादा ने लंड के कड़कपन के आगे घुटने टेक दिए।

दिनेश वापस कमरे में घुसा और माया के नज़दीक जाकर खड़ा हो गया।
उसने हौले से माया को पुकारा।
बहुत धीरे … सिर्फ इतना तेज की अगर सो रही हो तो नींद न टूटे और जग रही हो तो पता चल जाये।

लगातार 3 आवाज़ देते हुए दिनेश बेड पर बैठ गया।

चौथी बार आवाज़ देने के साथ उसने माया के सिर पर हाथ फिरा दिया।

इतने पर भी माया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया न देखकर दिनेश की हिम्मत बढ़ गयी।

अपने प्लान के तहत दिनेश ने आगे बढ़ते हुए माया के पेट पर हाथ रखते हुए उसकी स्कर्ट नीचे कर दी।(Family sex story)

कपड़े ठीक करना तो बहाना था, वो तो पूरा हाथ भर के अपनी बेटी का जिस्म सहलाना चाहता था।

खुली हथेली से उंगलियां फिराकर पूरा पेट नापते हुए दिनेश का हाथ ऊपर बढ़ने लगा।

गर्म मखमली नर्म चूचे को छूते ही दिनेश के जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया।
उसकी धड़कन जैसे रुक सी गयी।

दिनेश का पूरा ध्यान माया  की छाती पर था।
वो इस पल को कभी भूलना नहीं चाहता था।
ऐसा मौका कभी दोबारा मिले या न मिले इसलिए वो इस हर पल को अपने ज़ेहन में कैद कर लेना चाहता था।

उसने दोनों हाथ बढ़ा कर माया के एक चूचे को बहुत हल्के से पकड़ा, अंगूठे से उसके निप्पल को सहलाया।
दूसरे हाथ से उसने उसका टॉप सरका कर दूसरा चूचा भी बाहर निकाल लिया।

दिनेश ने दोनों हाथों में एक एक चूचे को पकड़ कर आंखें बंद कर ली।
उसे अहसास हुआ जैसे माया की माँ प्रीती के चूचे पकड़े हों।

एक पल के लिए वो भूल गया और झुक कर उसने अपना मुंह दोनों चूचों के बीच रख दिया।
कभी दरार के बीच नाक फंसा कर उसके जिस्म की खुशबू लेता तो कभी दोनों निप्पल को सहलाता।

माया के चूचे उसकी उम्र से बड़े थे।
शरीर का भराव उसकी माँ पर गया था।(Family sex story)

पतली कमर पर 34 इंची चूचे पाकर दिनेश जैसे पागल हो गया था।
वो वर्तमान को पूरी तरह से भूल चुका और भूतकाल में प्रीती को याद कर के कभी माया के चूचे दबाता तो कभी चाटता। निप्पल को मुँह में लेकर चूसता तो कभी दांतों से चुभलाता।
ऐसा लग रहा था जैसे सालों बाद प्रीती लौट आयी हो और आज दिनेश अपनी सारी हसरतें पूरी कर लेना चाहता हो।

माया के निप्पल थूक में भीग जाने के बाद ए.सी. की हवा से सिकुड़ कर तन गए थे जिसकी वजह से दिनेश को और मज़ा आ रहा था।

चूचों पर लगा थूक ए.सी. की वजह से माया को ठंडा लगने लगी थी और उधर दिनेश दीवानों की तरह माया को खा जाना चाहता था।

इस सब जद्दोजहद के बीच माया की गहरी नींद टूट गयी।
अपने ऊपर अचानक से किसी को इस तरह से झुका देख वो बहुत डर गई और अचानक से पलटी।

साथ ही उसे अहसास हुआ कि ये कोई और नहीं उसके पापा हैं।
उसे समझ नहीं आ रहा था वो कैसे रियेक्ट करे।
माया को जैसे सांप सूंघ गया; वो लाश की तरह ऐसे ही पड़ी रही।(Family sex story)

माया के अचानक इस तरह हिलने से दिनेश भी बहुत डर गया था, उसके माथे पर पसीना साफ नजर आ रहा था।

जब कुछ देर माया नहीं हिली तो दिनेश को लगा शायद नींद में ही करवट ली होगी।
उसने अपने माथे से पसीना पोंछा और माया के बगल में लेट गया।

छाती के आगे रखी कोहनी को उसने आराम से उठा कर ऊपर खिसका दिया।
जिससे दोनों का फायदा हो गया।
दिनेश का चूचों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया और माया का मुँह हाथ से ढक गया।
अब दिनेश माया के चेहरे पर आने वाले भावों को नहीं देख सकता था।

माया जानती थी कि उसका बाप उसके जिस्म के उभारों को कपड़ों के ऊपर से निहारता है।
लेकिन आज वही बाप कपड़ों की दीवार हटा कर उसके उभारों से खेल रहा था।

यह ख्याल माया के जिस्म को रोमांच से भर गया, उसके चूचे तन गए और निप्पल कड़क हो गए।
माया का दायें वाला निप्पल करवट के नीचे आ चुका था इसलिए अब एक ही चूचे से काम चलाना था।
दिनेश ने आगे बढ़ कर लेफ्ट निप्पल को होंठों में पकड़ लिया।(Family sex story)

माया ने पूरी ताकत से होंठ भींच लिए और आंखें बंद कर ली।
वो ऐसी कोई हरकत नहीं करना चाहती थी जिससे दिनेश को पता चले कि उसकी बेटी जग रही है।

साथ ही उसके मन में कौतूहल चल रहा था कि उसका बाप ऐसा क्यों कर रहा है।
उसे लगा था पापा को बस ऐसी कहानियां पढ़ने का शौक है। उसने कभी नहीं सोचा था उसके प्यारे पापा अपनी खुद की बेटी के साथ ये सब करने की इच्छा रखते होंगे।(Family sex story)

दिनेश ने लेटे हुए ही अपना हाथ बढ़ा कर माया की जांघ पर रख दिया और सरकाते हुए चूतड़ तक ले आये।

स्कर्ट को रास्ते से हटाने के बाद पूरी हथेली खोल कर माया के चूतड़ को हाथ मे भर लिया और निप्पल को चूसते हुए गांड की दरार के उंगली फिराने लगा।

दिनेश की ये हरकतें माया को पागल कर रही थी साथ ही कहीं न कहीं सामाजिक बंदिशें उसे याद भी दिला रहीं थी कि कोई बाप अपनी बेटी का सोते हुए फायदा कैसे उठा सकता है।(Family sex story)
लेकिन अब भी माया फैसला नहीं कर पाई थी आखिर वो इस परिस्थिति का सामना किया प्रकार करे।
वो दांत भींचे चुपचाप अपने पापा की हरकतों का मजा लेती हुई पड़ी रही।

दिनेश अचानक अपनी जगह से उठा और माया के पीछे आकर बैठ गया।
अब माया दिनेश को नहीं देख सकती थी लेकिन माया के भरे हुए चूतड़ों को दिनेश साफ देख सकता था।

दिनेश ने माया के दोनों चूतड़ों पर हाथ फिराया और बारी बारी दोनों को चूमा।
अब माया देख नहीं पा रही थी तो दिनेश का हर एक स्पर्श उसके लिए नया था।

माया नहीं जानती थी कि दिनेश ने अपने जिस्म से लोअर निकाल फेंका है और उसकी गांड से आधा फुट दूर उसके बाप का लौड़ा पूरी ताकत से तना खड़ा है।(Family sex story)

दिनेश ने 10-12 झटके अपने लंड पर लगाये ओर झुक कर माया की नंगी कमर चूमने लगा।
चूमते हुए वो नीचे आता गया और अब लगातार अपनी जवान बेटी के दोनों चूतड़ों को चूम रहा था, दांतों से हल्का हल्का पकड़ भी रहा था।

उसने दोनों हाथों से चूतड़ों को फैलाया और दरार में अपना मुँह घुसा दिया।

दिनेश के ऐसा करते ही माया चौंक गई।
उसने इतनी उम्मीद नहीं की थी।

उसकी हालत खराब हो रही थी, (Family sex story)चूत से रस बह रहा था।
उसे डर था कि कहीं चूत का गीलापन उसकी पोल न खोल दे।

दिनेश ने एक लंबी सांस खींची और बड़े ही आनंद भरी आवाज़ में बोला- प्रीती मेरी जान, आई लव यू। तेरी बेटी में तेरी हर खूबी भरी हुई है। वही चूचे, वही गांड, वही खशबू … आह!
इतना कह कर दिनेश फिर झुका और गांड के छेद पर अपनी जीभ टिका दी।

माया के लिए बाप के हमले अब बर्दाश्त के बाहर थे। माया अपना आपा कभी भी खो सकती थी।

दिनेश लगातार उसकी गांड की पूरी दरार में जीभ फिरा रहा था।(Family sex story)
वो दोबारा भूल गया था कि उसकी बेटी सो रही है; वो प्रीती के नशे में चूर लगातार चाटे जा रहा था।

माया को लगा कि अगर अब ये नहीं रुके तो किसी भी पल वो झड़ जाएगी और सारा भंडा फूट जाएगा।
वो अब तक भी फैसला नहीं कर पाई थी कि इस परिस्तिथि में कैसे पेश आया जाए।

जब उसे कुछ नहीं सूझा तो उसने अचानक खांसने की एक्टिंग चालू कर दी जैसे सोते सोते खांसी उठी हो।

माया की इस हरकत से दिनेश को होश आया।

(Family sex story)
उसे लगातार खांसती देख कर दिनेश को लगा अब वो पकड़ा जाएगा और बहुत गड़बड़ हो जाएगी।

दिनेश ने अपना लोअर उठाया और वो नंगा ही कमरे से बाहर निकल गया।

उन्हें भागता देख माया को पता लगा कि पापा नंगे थे उसके पीछे!
‘पापा नंगे क्यों थे?’
“क्या पापा मुझे चोदने वाले थे?”
‘नहीं नहीं, मुठ मार रहे होंगे मुझे नंगी देख कर!’(Family sex story)

माया के पापा थोड़ी देर पहले उस के बगल में नंगे बैठ कर उसकी गांड चाट कर मुठ मार रहे थे।
यह ख्याल उसको पागल कर रहा था।

उसकी चूत पहले से ही बह रही थी।
उसने फिर दो उंगली अपनी चूत में डाली और पानी निकाल दिया।

जिस्म को ठंडा करने के बाद माया को ख्याल आया कि ‘पापा मेरी गांड चाटते समय मम्मी का नाम ले रहे थे।’
‘पापा मम्मी से बहुत प्यार करते हैं।’
‘मम्मी के मरने के बाद पापा अकेले हो गए हैं।’
‘मैं मम्मी जैसी लगती हूँ इसीलिए पापा मेरे करीब आते हैं।’

अब माया को अपने बाप पर दया आने लगी थी।
उसकी नज़र में जो 2 – 4% दिनेश गलत था अब उसकी कोई गुंजाइश नहीं थी।
इन्ही सब ख्यालों में माया को नींद आ गयी।

उधर दिनेश भी अपने लन्ड को ठंडा कर ओर अपनी आज की बेवकूफी के लिए खुद को कोस कर सो गया।

आपको मेरी स्टोरी कैसी लगी  [email protected] पर मेल करके बताए.

(Family sex story)

Delhi Escorts

This will close in 0 seconds

Saale Copy Karega to DMCA Maar Dunga